Ujjain News : सूरज उगा है तो अस्त भी होगा, अहंकार क्यों? उज्जैन में ‘युवा धर्म संसद’ में बोले मोहन भागवत

HIGHLIGHTS
उज्जैन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं को धर्म, अहंकार, जीवन मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर संबोधित किया। करीब 1,700 जेन-जी प्रतिभागियों के बीच बोलते हुए भागवत ने कहा कि मनुष्य अक्सर अपने अहंकार के कारण यह मानने लगता है कि दुनिया उसकी इच्छा के मुताबिक चल सकती है, जबकि प्रकृति और जीवन की कई चीजें उसके नियंत्रण से बाहर हैं।
‘सूरज उगा है तो एक दिन अस्त भी होगा’
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सूर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि सूरज के उगने और डूबने पर मनुष्य का कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति सूर्य में विश्वास करे या न करे, लेकिन वह उगेगा और फिर अस्त होगा।भागवत के अनुसार, इंसान का अहंकार उसे यह भ्रम दे सकता है कि हर चीज उसके अधिकार और इच्छा के अनुसार चलनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से ऐसे अहंकार से बचने और जीवन की वास्तविकताओं को समझने की बात कही।
धर्म को बुजुर्गों का विषय मानना गलत
भागवत ने कहा कि उन्हें खुशी है कि ऐसे समय में युवा धर्म पर चर्चा कर रहे हैं, जब कुछ लोग धर्म को केवल बुजुर्गों से जुड़ा विषय मानते हैं। उन्होंने धर्म और पश्चिमी अवधारणा वाले ‘रिलिजन’ के बीच अंतर की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं माना गया है।उन्होंने धर्म को सत्य, करुणा, पवित्रता और आत्म-अनुशासन से जुड़ा बताया और कहा कि धर्म को केवल खोजने के बजाय उसे पहचानकर अपने आचरण में उतारना चाहिए।
कमाई के साथ दूसरों के हित की भी चिंता
भागवत ने आर्थिक जीवन में संतुलन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि धन कमाने पर रोक नहीं है, लेकिन व्यक्ति को अपनी जरूरत के मुताबिक रखने के बाद बाकी संसाधनों को दूसरों के साथ साझा करने की भावना रखनी चाहिए। उनके मुताबिक, व्यक्ति की आजीविका दूसरों के लिए परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए।उन्होंने अधिक कमाई की दौड़ में पारिवारिक जीवन प्रभावित होने का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जिससे व्यक्ति के साथ-साथ परिवार और समाज का जीवन भी आगे बढ़े।
प्रकृति की रक्षा भी धर्म का हिस्सा
RSS प्रमुख ने पर्यावरण संरक्षण को भी धर्म से जोड़ते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा करना मनुष्य का कर्तव्य है। उन्होंने जंगलों के विनाश और पर्यावरण के क्षरण को अधर्म बताया तथा युवाओं से अपनी परंपराओं के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए दूसरे तरीकों से उपासना करने वालों का सम्मान करने का आग्रह किया।
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