NRC News : SIR के बीच NRC पर RSS की मांग, देशभर में नागरिकता रजिस्टर लागू करने की उठाई आवाज

HIGHLIGHTS
देश में वोटर लिस्ट की जांच यानी SIR को लेकर बहस जारी है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पूरे देश में NRC लागू करने की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि देश में रहने वाले नागरिकों की सही पहचान होना जरूरी है। इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसंख्या में बदलाव और देश की सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ा गया है।RSS की इस मांग के बाद नागरिकता और वोटर लिस्ट को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। हालांकि, SIR और NRC दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। एक का संबंध चुनाव में मतदान करने वाले लोगों की सूची से है, जबकि दूसरा देश के नागरिकों की पहचान से जुड़ा है।
RSS ने NRC लागू करने की मांग क्यों उठाई?
RSS का कहना है कि देश में रहने वाले नागरिकों की पहचान का स्पष्ट रिकॉर्ड होना चाहिए। संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने NRC की जरूरत बताते हुए कहा कि नागरिकों की पहचान से जुड़े विषय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
संघ ने वोटर लिस्ट में गलत तरीके से शामिल लोगों की पहचान का मुद्दा भी उठाया है। हालांकि, मतदाता सूची की जांच और नागरिकता की जांच अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में होना अपने आप में NRC में दर्ज होने के बराबर नहीं है।RSS ने नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA का भी जिक्र किया है। CAA और NRC अलग-अलग विषय हैं। CAA कुछ निर्धारित परिस्थितियों में पड़ोसी देशों से आए पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता देने से जुड़ा है, जबकि NRC नागरिकों के रिकॉर्ड से संबंधित है।
SIR क्या है और NRC से कैसे अलग है?
SIR चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की विशेष जांच है। इसका मकसद यह देखना है कि मतदाता सूची में सही और पात्र लोगों के नाम दर्ज हों। चुनाव आयोग के पोर्टल पर SIR-2026 के लिए मतदाताओं की सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
NRC का उद्देश्य देश के नागरिकों का रजिस्टर तैयार करना है। दोनों के बीच अंतर इस प्रकार है:
| SIR | NRC |
|---|---|
| मतदाता सूची की जांच | नागरिकता का रिकॉर्ड |
| चुनाव आयोग की प्रक्रिया | नागरिकता से जुड़ी व्यवस्था |
| मतदान के लिए पात्रता से संबंधित | भारतीय नागरिक की पहचान से संबंधित |
इसलिए SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम की जांच को NRC लागू होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
NRC पर पहले भी अपनी बात रख चुका है RSS
RSS पहले भी नागरिकों की पहचान के लिए NRC की जरूरत का समर्थन कर चुका है। अब सुनील आंबेकर के बयान के बाद यह मांग फिर चर्चा में है। हालांकि, देशभर में NRC लागू करने के लिए सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा होना अलग बात है।असम में NRC की प्रक्रिया पहले हो चुकी है। वहां के अनुभव के बाद दस्तावेजों, नागरिकता की जांच और लोगों को अपनी बात रखने का अवसर देने जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे हैं। देशव्यापी प्रक्रिया की स्थिति में भी नियम और व्यवस्था स्पष्ट होना जरूरी होगा।
विपक्ष की आपत्तियां और आगे की स्थिति
NRC को लेकर विपक्ष के कुछ नेताओं ने दस्तावेजों की उपलब्धता और आम लोगों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। उनका सवाल है कि जिन लोगों के पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं, वे अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे। दूसरी ओर, RSS का कहना है कि नागरिकों की स्पष्ट पहचान जरूरी है। यह बहस केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। इसमें नागरिकों के अधिकार, प्रशासनिक प्रक्रिया और सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता जैसे विषय भी जुड़े हैं।
फिलहाल RSS की मांग सामने आई है, लेकिन देशव्यापी NRC लागू करने का सरकारी फैसला घोषित नहीं हुआ है। आगे इस मुद्दे पर सरकार की आधिकारिक घोषणा, नियम और प्रक्रिया ही इसकी वास्तविक दिशा तय करेंगे।
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