UP Politics: यूपी चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी और समर्थकों संग सपा में शामिल

HIGHLIGHTS
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने समाजवादी पार्टी (SP) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। वह अपनी बेटी एडवोकेट कीर्ति कश्यप के साथ सपा में शामिल हुए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में दोनों ने पार्टी का दामन थामा। धर्मेंद्र कश्यप के इस फैसले को बरेली और आंवला क्षेत्र की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
धर्मेंद्र कश्यप आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं। उनके सपा में शामिल होने से क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, आगामी चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के बाद बढ़ी थी नाराजगी की चर्चा
धर्मेंद्र कश्यप लंबे समय तक भाजपा की राजनीति का हिस्सा रहे। वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आंवला सीट से जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (BSP) से हुई थी। वर्ष 2002 में वह बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए। इसके बाद 2003 में उन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख किया। मुलायम सिंह यादव की सरकार में उन्हें राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी मिली।बाद में धर्मेंद्र कश्यप भाजपा में शामिल हो गए और वर्ष 2014 में आंवला से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 2019 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।
हाल के दिनों में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की ओर से उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद उनकी नाराजगी की चर्चाएं सामने आई थीं। सात अक्टूबर 2026 को उनकी ओर से सोशल मीडिया पर की गई ‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट को भी इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।अब बेटी के साथ सपा में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक पारी ने नया मोड़ ले लिया है।
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PDA समीकरण को मजबूत करने में जुटी सपा
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव आगामी चुनावों को देखते हुए पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्गों के बीच पार्टी का आधार मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को संगठन में शामिल करना भी इसी राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। इससे पहले बदायूं के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य भी अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। उनके सपा में आने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई थी।
धर्मेंद्र कश्यप का पार्टी में शामिल होना सपा के लिए बरेली और आंवला क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है। वह पहले विधायक और सांसद के रूप में काम कर चुके हैं, इसलिए क्षेत्र की राजनीति में उनका अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, किसी नेता के दल बदलने से चुनावी नतीजों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह स्थानीय संगठन, मतदाताओं की प्रतिक्रिया और दूसरे राजनीतिक दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप के सपा में आने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि समाजवादी पार्टी इस घटनाक्रम का क्षेत्रीय स्तर पर किस तरह लाभ उठाती है।
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