UP News: 57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधाएं, 11,350 पंचायतों में बनेंगी डिजिटल लाइब्रेरी; CM योगी ने बताया ग्राम स्वराज का मॉडल

HIGHLIGHTS
लखनऊ : गांधी जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण विकास और ग्राम स्वराज को लेकर सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गांवों को विकास की अंतिम कड़ी के तौर पर देखने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की शुरुआती इकाई के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 57,600 ग्राम सचिवालयों में ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने का काम चल रहा है।
गांवों में सरकारी सेवाओं को आसान बनाने पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने गांधी जयंती पर अपने संदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की पहुंच और पंचायत व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल का उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि ग्राम सचिवालयों को स्थानीय स्तर पर जरूरी सेवाओं और प्रशासनिक कामकाज का केंद्र बनाने की दिशा में काम किया गया है। ई-ग्राम स्वराज और डिजिटल भुगतान जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य पंचायतों के काम को अधिक व्यवस्थित और ऑनलाइन बनाना है।ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए पंचायत स्तर पर होने वाले कार्यों की निगरानी को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की बात कही गई है।
57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल व्यवस्था
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के 57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।इनमें ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे पंचायतों के कामकाज में रिकॉर्ड रखने, भुगतान और निगरानी जैसे कार्यों को डिजिटल माध्यम से करने में मदद मिलती है।मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि ग्राम सचिवालयों के संचालन से गांवों में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। उनके अनुसार, प्रत्येक गांव में करीब 5 से 7 रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए सरकारी दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।
11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी
ग्रामीण युवाओं और विद्यार्थियों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी योजना भी सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है।मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य गांवों में पढ़ाई और डिजिटल अध्ययन की सुविधा को बढ़ाना है। पहले की रिपोर्टिंग के मुताबिक इन लाइब्रेरियों में किताबों के साथ डिजिटल अध्ययन सामग्री, ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो सामग्री और अन्य शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने की योजना है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को अपने गांव के आसपास अध्ययन की सुविधा मिल सकती है।
गांव के युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है डिजिटल लाइब्रेरी?
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को कई बार किताबों, इंटरनेट और अध्ययन सामग्री के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होने पर विद्यार्थियों को पंचायत स्तर पर अध्ययन के लिए एक स्थान मिल सकता है। इंटरनेट आधारित सामग्री, ई-बुक्स और अन्य डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता से पढ़ाई के विकल्प बढ़ सकते हैं।हालांकि, इसका वास्तविक लाभ लाइब्रेरी के नियमित संचालन, उपलब्ध संसाधनों और इंटरनेट जैसी सुविधाओं पर निर्भर करेगा।
ग्राम स्वराज को आत्मनिर्भरता से जोड़ा
मुख्यमंत्री ने ग्राम स्वराज की अवधारणा को महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर गांव के विचार से जोड़ते हुए कहा कि मजबूत पंचायत और बेहतर ग्रामीण अर्थव्यवस्था इसके लिए जरूरी हैं।उन्होंने कहा कि सरकार गांवों को केवल योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि विकास की प्रक्रिया में सक्रिय इकाई के रूप में देखती है।मुख्यमंत्री ने अपने बयान में पूर्व की सरकारों की ग्रामीण विकास व्यवस्था पर भी टिप्पणी की और कहा कि 2017 से पहले गांवों में विकास के बजाय वादों पर ज्यादा जोर था। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आकलन है; इस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अलग राय हो सकती है।
पंचायतों में पारदर्शिता पर सरकार का जोर
ई-ग्राम स्वराज और ऑनलाइन मॉनिटरिंग का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ना है।डिजिटल भुगतान की व्यवस्था से पंचायतों से जुड़े भुगतान को ऑनलाइन प्रक्रिया में लाने की कोशिश की गई है। सरकार का कहना है कि इससे पंचायतों के काम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलती है। हालांकि, किसी भी डिजिटल व्यवस्था का असर उसके इस्तेमाल, डेटा की गुणवत्ता और स्थानीय स्तर पर निगरानी की प्रभावशीलता पर निर्भर करता है।
डिजिटल लाइब्रेरी योजना पहले से चल रही है
11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी का विषय नया नहीं है। जुलाई 2026 की रिपोर्टिंग में भी पंचायती राज विभाग की इस योजना का उल्लेख किया गया था। उस समय बताया गया था कि किताबों, आईटी उपकरणों और फर्नीचर की व्यवस्था के साथ डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि 11,350 डिजिटल लाइब्रेरी की योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
आगे क्या बदलेगा?
ग्राम सचिवालयों की डिजिटल सुविधाएं और पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी ग्रामीण प्रशासन और शिक्षा से जुड़े दो अलग-अलग क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती हैं।एक तरफ ग्राम सचिवालयों के जरिए पंचायत से जुड़ी सेवाओं और कामकाज को डिजिटल माध्यम से संचालित करने का प्रयास है। दूसरी तरफ डिजिटल लाइब्रेरी से विद्यार्थियों और युवाओं को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की योजना है।
यदि इन सुविधाओं का नियमित संचालन और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होता है, तो गांवों में सरकारी सेवाओं और अध्ययन के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं बढ़ सकती हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री ने गांधी जयंती पर ग्राम स्वराज को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश से जोड़ते हुए इन पहलों को ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है। डिजिटल लाइब्रेरी योजना के पूरी तरह लागू होने के बाद ही इसके जमीनी असर का आकलन किया जा सकेगा।
स्वतंत्र और भरोसेमंद समाचारों के लिए Nation24 Network को अपना सहयोग दें।
