पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश में दिल्ली में आधी रात अवैध रेड मामला: फरहाद सूरी का बयान दर्ज, ACP पीयूष सिंह करेंगे जांच

HIGHLIGHTS
गाज़ियाबाद : पत्रकार अभिषेक उपाध्याय से जुड़े रोड-रेज मामले में कथिततौर पर आधी रात यूपी पुलिस की दिल्ली में जाकर की गयी कार्रवाई की जांच तेज हो गई है। 29 सितंबर 2026 को पूर्व दिल्ली महापौर फरहाद सूरी ने अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अपराध), कमिश्नरेट गाजियाबाद के समक्ष अपना विस्तृत बयान दर्ज कराया। सूरी का कहना है कि गाजियाबाद से आई उत्तर प्रदेश पुलिस की एक बड़ी टीम ने उनके आवास पर पहुंचकर बिनी किसी वारंट के तलाशी लेने का प्रयास किया। सूरी के अनुसार दबिश देने गयी पुलिस टीमें में लगभग 12 वाहन और करीब 50 लोग शामिल थे, जिनमें कई लोग सादे कपड़ों में भी थे।
क्या है पूरा मामला?
फरहाद सूरी के अनुसार, 22 और 23 अगस्त की मध्यरात्रि लगभग 12:45 बजे रात की है। उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम बिना किसी वारंट के उनके C-33A, ईस्ट निजामुद्दीन स्थित आवास पर पहुंची। उन्होंने अपने बयान में कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि केवल कुछ वाहन आए हैं, लेकिन बाद में कॉलोनी के विभिन्न स्थानों पर खड़े पुलिस वाहनों को देखने के बाद उन्हें अंदाजा हुआ कि कुल मिलाकर लगभग 12 वाहन और करीब 50 लोग मौजूद थे। सूरी का दावा है कि इस टीम का नेतृत्व उस समय गाजियाबाद के एसीपी सूर्यबली मौर्य कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग वर्दी में नहीं थे, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कौन पुलिसकर्मी था और कौन अन्य व्यक्ति।
तलाशी वारंट न दिखाने का आरोप
अपने बयान में फरहाद सूरी ने आरोप लगाया कि पुलिस टीम ने उनसे कहा कि उनके घर में एक कथित “डबल मर्डर” का आरोपी छिपा हुआ है और इसी आधार पर तलाशी लेने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने तत्काल पुलिस से तलाशी वारंट और कानूनी अधिकार का आधार पूछा, लेकिन उनके अनुसार उन्हें कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखाया गया। सूरी का कहना है कि पूरी कार्रवाई के दौरान उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और उन्हें धमकाया भी गया।
स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
फरहाद सूरी ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि दिल्ली के निजामुद्दीन थाना को कथित अभियान की पूरी जानकारी पहले से नहीं थी। उनके अनुसार, थाना रिकॉर्ड में उत्तर प्रदेश पुलिस दल की आमद संबंधी प्रविष्टि लगभग 1:01 बजे रात दर्ज हुई, जबकि कथित कार्रवाई उससे पहले हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि उनके पास संबंधित डीडी एंट्री (डेली डायरी प्रविष्टि) की प्रति उपलब्ध है, जिसे उन्होंने जांच अधिकारी को सौंप दिया है।
फोटो, वीडियो और डिजिटल साक्ष्य सौंपे
सूरी ने जांच के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही है। फ़िलहाल, उनके अनुसार उन्होंने घटना के फोटो और वीडियो फुटेज, आवास के बाहर मौजूद पुलिस अधिकारियों के वीडियो, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका से जुड़े दस्तावेज, पूर्व में दी गई लिखित शिकायतों की प्रतियां जांच अधिकारी को उपलब्ध कराई हैं। उन्होंने मांग की है कि घटना से जुड़े CCTV फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), वायरलेस संदेश, कंट्रोल रूम लॉग, वाहन पंजीकरण विवरण, ड्यूटी एवं मूवमेंट रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित किए जाएं ताकि समय के साथ महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट न हों।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था मामला
इस घटनाक्रम के बाद फरहाद सूरी ने (Writ Petition (Criminal) No. 359/2026 – Farhad Suri vs State of Uttar Pradesh & Others) सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 15 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि शिकायतकर्ता FIR दर्ज कराना चाहते हैं तो वे संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले पुलिस थाने में उचित आवेदन दे सकते हैं या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 175(3) के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय अपना सकते हैं। इसी आधार पर याचिका का निस्तारण किया गया था।
फरहाद सूरी की मांग
अपने बयान में फरहाद सूरी ने कहा है कि जांच का उद्देश्य केवल उनका बयान दर्ज करना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उस रात उस पुलिस टीम में मौजूद सभी व्यक्तियों की पहचान हो, पुलिस टीम के आगमन और प्रस्थान का सत्यापन किया जाए, इलेक्ट्रॉनिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं, संबंधित अधिकारियों की भूमिका निष्पक्ष रूप से जांची जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि जांच के दौरान किसी संज्ञेय अपराध का प्रथमदृष्टया खुलासा होता है, तो कानून के अनुसार FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाए।
राम मंदिर चंदे पर रिपोर्ट करने वाले पत्रकार की तलाश में कथित रेड का मामला
दिल्ली के पूर्व महापौर फरहाद सूरी ने आरोप लगाया था कि गाजियाबाद पुलिस की एक बड़ी टीम ने 22–23 अगस्त 2026 की आधी रात उनके निजामुद्दीन ईस्ट स्थित आवास पर कथित छापेमारी की। सूरी के अनुसार, पुलिस टीम पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश में उनके घर पहुंची थी।
दरअसल, वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने TOP Secret चैनल पर सबसे पहले अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी से जुड़ी ख़बर ब्रेक करके बड़ा भंडाफोड़ किया था। उनकी ये स्टोरी इंटरनेशनल लेवल पर चर्चा का विषय बनी। इसके बाद उनका आरोप है की उनके खिलाफ गाजियाबाद के इंदिरानगर थाने में एक कथित रोड-रेज मामले में स्क्रिप्टेड FIR दर्ज हुई। दिल्ली के पूर्व महापौर फरहाद सूरी का दावा है कि पुलिस ने इसी मामले में पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश का हवाला देते हुए उनके घर पर कार्रवाई की, जबकि उन्हें कोई तलाशी वारंट नहीं दिखाया गया।
फ़िलहाल, इस पूरे मामले में जाँच जारी है। दिल्ली के पूर्व महापौर फरहद सूरी के बयान के बाद अब यह देखना होगा कि कथिततौर पर बिना किसी वारंट के अवैध तरीके से दिल्ली में घुसकर दबिश देने के मामले में यूपी पुलिस की इस कार्यशाली को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।
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