Jaunpur News: क्राइम ब्रांच बनकर लूट का आरोप, 2 निलंबित सिपाहियों समेत 5 पर कार्रवाई; थानाध्यक्ष पहले ही निलंबित, SIT जांच में अहम खुलासे

HIGHLIGHTS
जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में पुलिसकर्मियों पर जबरन वसूली और पद के कथित दुरुपयोग और भ्रस्टाचार से जुड़े दो मामलों में जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने कड़ी कार्रवाई की है। जौनपुर पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो निलंबित आरक्षियों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा दो अन्य नामजद आरोपियों ने 23 सितंबर को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, दोनों मामलों में अब तक कुल पांच आरोपी गिरफ्तार या न्यायालय में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें सुरेरी थाने में तैनात रहे दो निलंबित आरक्षी भी शामिल हैं। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान सामने आने वाले अन्य आरोपियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दो अलग-अलग मामलों से शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई दो अलग-अलग शिकायतों से जुड़े मामलों में हुई। पहला मुकदमा थाना जलालपुर में 17 सितंबर 2026 को दर्ज किया गया था। इसमें संकीत सिंह और विकास सहित चार अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया।
शिकायत के अनुसार, 15 सितंबर को जानपुर के जलालपुर थान क्षेत्र के रामपुर सोइरी निवासी विजय राजभर को कथित तौर पर अपने साथ ले जाने के बाद चार पहिया वाहन में मौजूद कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की और पैसे की मांग की। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, पीड़ित के मोबाइल से यूपीआई के माध्यम से करीब 2.15 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए गए और एटीएम के जरिए भी धनराशि निकाली गई।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपों से जुड़े डिजिटल और अन्य साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया।
सुरेरी थाने से जुड़ा दूसरा मामला
दूसरा मामला थाना सुरेरी में 22 सितंबर को दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में राजेन्द्र दूबे के साथ सादे कपड़ों में मौजूद कुछ अज्ञात लोगों और एक खाताधारक को भी आरोपी बनाया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि वाराणसी के चिलबिला निवासी पीड़ित सुशील पाण्डेय को फोन करके मिलने के लिए बुलाया गया। इसके बाद सादे कपड़ों में मौजूद कुछ लोगों ने स्वयं को पुलिसकर्मी बताया और उसे वाहन में बैठाकर ले गए। शिकायत के मुताबिक, इस दौरान करीब 1.65 लाख रुपये की धनराशि ली गई और यूपीआई के माध्यम से एक बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर कराए गए।
पुलिस ने इस मामले में भी संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
तत्कालीन फरार सुरेरी थानाध्यक्ष पहले ही निलंबित
दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सुरेरी थाने के तत्कालीन फरार थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह को 18 सितंबर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तर पर विशेष जांच टीम गठित करने का निर्णय लिया गया। पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र के निर्देश पर 22 सितंबर को पांच सदस्यीय एसआईटी बनाई गई।
पुलिस के मुताबिक, एसआईटी का पर्यवेक्षण अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, जौनपुर आतिश कुमार सिंह कर रहे हैं। टीम का नेतृत्व सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर जौनपुर गोल्डी गुप्ता को सौंपा गया है। टीम में सह-विवेचक के तौर पर एक निरीक्षक और एक उपनिरीक्षक भी शामिल हैं।
24 घंटे में पुलिसकर्मियों की पहचान का दावा
जौनपुर पुलिस का कहना है कि एसआईटी ने जांच शुरू करने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया और करीब 24 घंटे में मामले में कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान कर ली। इसके बाद 23 सितंबर को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में मनीष पटेल, निलंबित आरक्षी सत्येन्द्र कुमार गौड़ और निलंबित आरक्षी विष्णु सिंह शामिल हैं। दोनों आरक्षियों की पूर्व तैनाती सुरेरी थाने में बताई गई है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरक्षियों के खिलाफ जबरन वसूली, लूट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।
दो आरोपियों ने कोर्ट में किया सरेंडर
पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया कि लगातार दबिश और कार्रवाई के बीच दो वांछित आरोपियों संकीत सिंह और विकास ने 23 सितंबर को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
इस तरह दोनों मामलों में अब तक पांच आरोपी पुलिस कार्रवाई की जद में आ चुके हैं। इनमें तीन की गिरफ्तारी हुई है, जबकि दो ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया है।पुलिस ने यह भी कहा है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। विवेचना के दौरान अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं और इनमें कुछ पुलिसकर्मियों के शामिल होने की बात भी पुलिस ने कही है। ऐसे लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
डिजिटल लेनदेन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा
इस पूरे मामले में पैसों के लेनदेन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में यूपीआई और एटीएम के माध्यम से धनराशि स्थानांतरित या निकाले जाने की शिकायत सामने आई है।
ऐसे मामलों में बैंक लेनदेन, यूपीआई रिकॉर्ड, मोबाइल फोन की जानकारी, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। एसआईटी द्वारा इन्हीं पहलुओं के आधार पर आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का परीक्षण किया जा रहा है।
हालांकि, जांच पूरी होने और न्यायालय में मामले के परीक्षण से पहले किसी आरोपी को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं होगा। फिलहाल आरोपों और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।
पुलिस विभाग ने दोहराई जवाबदेही की बात
जौनपुर पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि आम लोगों के साथ आपराधिक कृत्य या पुलिस पद के दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुलिस ने भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा अवैध वसूली, दुर्व्यवहार या पद के गलत इस्तेमाल की शिकायत हो तो इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाए। पुलिस के मुताबिक, ऐसी शिकायतों की जांच नियमानुसार की जाएगी।
आगे की जांच पर टिकी नजर
जौनपुर के इन दोनों मामलों में शुरुआती कार्रवाई के बाद अब एसआईटी की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि घटनाओं में किस-किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, धनराशि किन खातों में गई, कथित घटनाओं में पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या रही और उपलब्ध साक्ष्य आरोपों की कितनी पुष्टि करते हैं।
फिलहाल पांच आरोपी पुलिस कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं, जबकि जांच एजेंसी अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।
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