MP News: बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत पर बवाल, HC ने सरकार से मांगा जवाब; राहुल गांधी ने सरकार पर उठाए सवाल

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मध्य प्रदेश: बालाघाट जिले के दूरदराज आदिवासी इलाकों में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बैहर और बिरसा ब्लॉक के आदिवासी गांवों में बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था, कुपोषण, साफ पानी और समय पर इलाज की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रभावित बच्चों में खसरा, मलेरिया, श्वसन संबंधी परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याएं सामने आई हैं। केंद्र की जांच में अब तक किसी एक संक्रमण को सभी मौतों का एकमात्र कारण नहीं बताया गया है।
मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट कलेक्टर समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, अस्पतालों में क्षमता से अधिक मरीजों और दूषित पानी जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को तय की है।
याचिका से जुड़े एक निरीक्षण में प्रभावित गांवों के कुछ हैंडपंपों से पीले रंग का पानी निकलने और बच्चों तथा महिलाओं को पर्याप्त पौष्टिक भोजन नहीं मिलने के आरोप लगाए गए। रिपोर्ट में इलाके की साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
राहुल गांधी ने मोहन यादव सरकार पर साधा निशाना
इस मामले पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी मध्य प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए। 17 सितंबर को एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा कि बालाघाट में बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से राज्य की जमीनी स्थिति देखने की अपील करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था, साफ पानी और पोषण को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में मध्य प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोप भी लगाए। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर सरकार का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध स्रोतों में शामिल नहीं है।
गांवों में पहुंचाई जा रही स्वास्थ्य सेवाएं
मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने के कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य टीमों को गांवों में भेजकर बच्चों की स्क्रीनिंग और इलाज किया जा रहा है। अस्पतालों में बेड बढ़ाने, क्षेत्र में सैनिटाइजेशन और स्वास्थ्य निगरानी जैसी गतिविधियां भी शुरू की गई हैं।
बालाघाट के आदिवासी इलाकों में सामने आई यह स्थिति अब प्रशासनिक और न्यायिक जांच के दायरे में है। हाई कोर्ट में सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब और आगे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बच्चों की मौतों के पीछे कौन-कौन से चिकित्सकीय, पोषण संबंधी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कारक जिम्मेदार रहे।
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