Mumbai News: मालाड में 4 साल से फ्रीजर में रखा था बुजुर्ग का शव, दोबारा जिंदा होने की उम्मीद में हर महीने 1.60 लाख रुपये खर्च, जांच में जुटी पुलिस

HIGHLIGHTS
मुंबई: मुंबई के मालाड इलाके में एक निजी डे केयर सेंटर से जुड़ा मामला सामने आने के बाद पुलिस जांच में जुटी है। कुरार क्षेत्र स्थित सेंटर के एक फ्रीजर से 78 वर्षीय बुजुर्ग का शव मिलने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग की मृत्यु जून 2022 में कैंसर के कारण हुई थी। इसके बाद शव को लंबे समय तक फ्रीजर में रखे जाने की बात सामने आई है।
मामला तब सामने आया जब सेंटर से दुर्गंध आने की शिकायत की गई। पुलिस मौके पर पहुंची तो सेंटर बंद मिला। इसके बाद पुलिस ने परिसर में प्रवेश किया और फ्रीजर की जांच के दौरान शव बरामद किया। प्रारंभिक जांच में परिवार की ओर से बुजुर्ग की मृत्यु से जुड़े दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शव को इतने लंबे समय तक निजी परिसर में रखने की व्यवस्था कैसे हुई और इसमें किन लोगों को जानकारी थी।
बदबू की शिकायत से खुला मामला
कुरार इलाके में स्थित इस सेंटर से दुर्गंध आने की शिकायत मिलने के बाद पुलिस की टीम वहां पहुंची थी। सेंटर बंद होने के कारण पुलिस को ताला खोलकर अंदर जाना पड़ा। परिसर की जांच के दौरान एक फ्रीजर मिला, जिसमें बुजुर्ग का शव रखा था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसकी पहचान और मृत्यु से संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू की। शुरुआती जानकारी के अनुसार मृतक अंधेरी इलाके में रहते थे और उनकी उम्र 78 वर्ष थी।

परिवार की तरफ से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में उनकी मृत्यु 9 जून 2022 को होने की जानकारी बताई गई है। मृत्यु का कारण कैंसर बताया गया है। पुलिस अब दस्तावेजों और मौके से मिली जानकारी का आपस में मिलान कर रही है।
शव को सुरक्षित रखने के पीछे क्या वजह थी?
इस मामले का सबसे अलग पहलू शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की वजह है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, बुजुर्ग के परिवार को क्रायोनिक्स की अवधारणा के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद भविष्य में चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के जरिए मृत व्यक्ति को दोबारा जीवन देने की संभावना को लेकर परिवार में उम्मीद बनी। इसी सोच के आधार पर शव को संरक्षित रखने का फैसला किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, यह परिवार से जुड़ा दावा है और पुलिस की जांच में इसकी पूरी पुष्टि होना अभी बाकी है।
यहां यह समझना जरूरी है कि क्रायोनिक्स को लेकर वैज्ञानिक दुनिया में चर्चा जरूर होती है, लेकिन वर्तमान समय में किसी मृत इंसान को इस प्रक्रिया के जरिए सफलतापूर्वक दोबारा जीवित किए जाने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए भविष्य में ऐसा संभव होगा या नहीं, इसे निश्चित परिणाम के तौर पर नहीं बताया जा सकता।
हर महीने 1.60 लाख रुपये भुगतान की बात
मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सेंटर से जुड़े एक व्यक्ति के अनुसार, शव को वहां रखने के बदले परिवार की ओर से हर महीने करीब 1.60 लाख रुपये दिए जाने की बात कही गई है। अब पुलिस इस भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि भुगतान किस व्यक्ति या संस्था के माध्यम से किया जाता था और सेंटर के साथ इसके लिए क्या शर्तें तय की गई थीं। अगर लंबे समय तक भुगतान किया गया था तो उसके दस्तावेज और लेनदेन का रिकॉर्ड मामले की जांच में महत्वपूर्ण होगा ।
सेंटर के इस्तेमाल का इतिहास भी जांच में शामिल
पुलिस की जांच केवल शव तक सीमित नहीं है। सेंटर के इस्तेमाल और वहां काम करने वाले लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।बताया गया है कि जिस परिसर में डे केयर सेंटर संचालित हो रहा था, उसका इस्तेमाल पहले अलग गतिविधियों के लिए किया जाता था। समय के साथ वहां किरायेदार और संचालन से जुड़ी परिस्थितियां बदलती रहीं। ऐसे में पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग समय पर परिसर का संचालन करने वाले लोगों को फ्रीजर और उसमें रखे शव के बारे में क्या जानकारी थी।
BMC की सीलिंग भी जांच का हिस्सा
जानकारी के अनुसार, बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुछ समय पहले इस सेंटर को सील किया था। इसके बाद यह सवाल भी जांच के दायरे में आया है कि सेंटर को सील करते समय वहां मौजूद सामान और फ्रीजर की क्या स्थिति थी। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि सीलिंग के समय क्या निरीक्षण हुआ था और उस दौरान फ्रीजर की जांच की गई थी या नहीं।
निजी सेंटर में शव रखने की व्यवस्था पर सवाल
मामले में पुलिस यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि शव को अस्पताल की मोर्चरी के बजाय निजी सेंटर में क्यों रखा गया।किसी शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सामान्य तौर पर निर्धारित चिकित्सा या शवगृह सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए जांच का एक हिस्सा यह भी होगा कि परिवार और सेंटर के बीच किस तरह की व्यवस्था बनी थी और क्या इसके लिए कोई दस्तावेज या अनुमति मौजूद थी।पुलिस यह भी देख सकती है कि सेंटर में शव को रखने की जानकारी किस-किस व्यक्ति को थी और इसकी देखरेख किस तरह की जा रही थी।
पुलिस ने अभी तक FIR दर्ज नहीं की
फिलहाल इस मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने की जानकारी नहीं है। पुलिस परिवार के सदस्यों, सेंटर से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है। मृतक की पहचान, मृत्यु प्रमाणपत्र, भुगतान से संबंधित जानकारी और शव को संरक्षित रखने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। आगे की कार्रवाई उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जा सकती है।
क्रायोनिक्स को लेकर क्या जानना जरूरी है?
क्रायोनिक्स ऐसी अवधारणा है जिसमें मृत्यु के बाद शरीर या मस्तिष्क को बेहद कम तापमान पर संरक्षित करने का प्रयास किया जाता है। इसका आधार यह उम्मीद है कि भविष्य में विज्ञान ऐसी तकनीक विकसित कर सकता है, जिससे आज इलाज से बाहर मानी जाने वाली क्षति को ठीक किया जा सके। लेकिन मौजूदा वैज्ञानिक स्थिति में क्रायोनिक्स के जरिए किसी मृत व्यक्ति को वापस जीवित करने की प्रमाणित सफलता नहीं है। इसलिए इसे स्थापित चिकित्सा उपचार के बजाय भविष्य की संभावनाओं से जुड़ी अवधारणा के रूप में समझना चाहिए।
अब जांच में किन बातों पर नजर?
मालाड मामले में पुलिस के सामने कई सवाल हैं। शव को चार साल तक कहां और किस व्यवस्था के तहत रखा गया? सेंटर को भुगतान किसने किया? वहां काम करने वाले लोगों को इसकी जानकारी थी या नहीं? सेंटर को सील किए जाने के समय क्या जांच हुई थी? और शव को संरक्षित रखने के लिए परिवार ने कौन-सी व्यवस्था तय की थी?
इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने पर सामने आएंगे। फिलहाल शव की स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर पुलिस कूपर अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी सलाह ले रही है।
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