Jaunpur News: 25 हजार के इनामी भगोड़े पूर्व थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह ने कोर्ट में किया सरेंडर, जेल भेजे गए

HIGHLIGHTS
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सुरेरी थाने के पूर्व थानाध्यक्ष और निलंबित उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह ने अदालत में सरेंडर कर दिया। पुलिस की ओर से उन पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। सरेंडर के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। यह मामला कथित तौर पर लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में रखने, पूछताछ के दौरान उत्पीड़न करने और उनके बैंक खातों से अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराने के आरोपों से जुड़ा है।मामले में पुलिस की जांच और अदालत की कार्यवाही जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, जौनपुर के विजय राजभर और वाराणसी के सुशील पाण्डेय ने डीआईजी वाराणसी वैभव कृष्ण से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्हें पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर सिविल ड्रेस में जाकर जबरन हिरासत में लिया और सुरेरी थाने परिसर में एक कमरे में रखा गया। हाथ में तमंचा देकर वीडियो बनाया गया। और जेल भेजने की धमकी देकर लाखों रुपए जबरन वसूले हुए। शिकायतकर्ताओं ने पूछताछ के दौरान मारपीट और दबाव बनाने के भी आरोप लगाए।शिकायत में यह भी दावा किया गया कि उनसे अलग-अलग बैंक खातों में लाखों रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए। दोनों शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराई गई। पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर जांच के लिए 5 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता का अंतिम निर्धारण जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होगा।जलालपुर और सुरेरी थाने से जुड़े मामलों में जांच मामले में डीआईजी वाराणसी वैभव कृष्ण के निर्देश पर जलालपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके अलावा सुरेरी थाने से जुड़े घटनाक्रम को भी जांच के दायरे में रखा गया।जांच के दौरान पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। इसी बीच सुरेरी थाने में तैनात वर्ष 2025 बैच के आरक्षी अभिषेक सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला भी सामने आया। इस घटना के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह के फरार होने की जानकारी सामने आई।
फरारी के बाद घोषित हुआ 25 हजार रुपये का इनाम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिव्य प्रकाश सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद उन्हें निलंबित किए जाने और विभागीय कार्रवाई शुरू होने की जानकारी सामने आई।बाद में 24 सितंबर को पुलिस की ओर से दिव्य प्रकाश सिंह समेत दो आरोपियों पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। इसके बाद उनकी तलाश तेज किए जाने की बात कही गई।इनाम घोषित होने के कुछ समय बाद ही पूर्व थानाध्यक्ष ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
अदालत में सरेंडर के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजे गए दिव्य प्रकाश सिंह
सोमवार को फरार आरोपी जौनपुर कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा । सीजेएम के अवकाश पर होने के कारण मामला एसीजेएम कोर्ट के समक्ष गया। अदालत ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें जिला जेल भेज दिया गया। हालांकि, मामले में आरोपों की सुनवाई और जांच की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी तथा अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय करेगी।
अधिवक्ता ने आरोपों को बताया गलत
सरेंडर करने वाले पूर्व थाना प्रभारी दिव्य प्रकाश सिंह के अधिवक्ता शुभम सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता के अनुसार, जलालपुर थाने में दर्ज मामले में उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया गया है।अधिवक्ता ने बताया कि दिव्य प्रकाश सिंह अदालत में आत्मसमर्पण के लिए पहुंचे थे। सीजेएम के अवकाश पर होने के कारण एसीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई और अदालत ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
दूसरी ओर, पुलिस की जांच में लगाए गए आरोपों और दर्ज मुकदमे की धाराओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के दावों के साथ-साथ एफआईआर, जांच रिपोर्ट, बैंक लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों का महत्व होगा।
जांच के दौरान किन बिंदुओं पर रहेगी नजर?
मामले की आगे की जांच में कई अहम सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं। शिकायतकर्ताओं को कथित रूप से हिरासत में लिए जाने की परिस्थितियां क्या थीं, पुलिस कार्रवाई का आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है, कथित ऑनलाइन ट्रांसफर किन खातों में हुए और इन लेनदेन का मामले से क्या संबंध है—इन सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।इसके अलावा पुलिसकर्मियों की भूमिका, थाने में उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य संबंधित साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है। यदि जांच में किसी आरोप की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। वहीं, यदि किसी आरोप के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं तो उसका निर्धारण भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा।फिलहाल दिव्य प्रकाश सिंह के सरेंडर के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। अब जांच की प्रगति और अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में किन तथ्यों की पुष्टि होती है। हालांकि फिल्मी अंदाज में फरार 25 हजार के इनामी पूर्व थानेदार का जौनपुर कोर्ट में ही जाकर सरेंडर करना चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्वतंत्र और भरोसेमंद समाचारों के लिए Nation24 Network को अपना सहयोग दें।
