Jaunpur News: Zero Tolerance पर SSP कुंवर अनुपम सिंह का सख्त संदेश, भ्रष्टाचार और अराजकता की छूट किसी को नहीं, जनता से अपील- अवैध वसूली की दें सूचना

HIGHLIGHTS
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सुरेरी थाना क्षेत्र से जुड़े कथित जबरन वसूली और पुलिस पद के दुरुपयोग के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, दो अलग-अलग मामलों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई के बाद दो निलंबित आरक्षियों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, दो अन्य नामजद आरोपियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया है।
इस पूरे प्रकरण में जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने भ्रष्टाचार और पुलिस पद के दुरुपयोग को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को भ्रष्टाचार या अराजकता की छूट नहीं दी जा सकती। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा अवैध वसूली या दुर्व्यवहार किया जाता है तो इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाए।
सिविल ड्रेस में उठाने का आरोप, थाने में पैसे ट्रांसफर कराने की शिकायत
मामला दो शिकायतों से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ लोग सादे कपड़ों में उनके पास पहुंचे और खुद को क्राइम ब्रांच से जुड़ा पुलिसकर्मी बताया। आरोप है कि उन्हें जबरन वाहन में बैठाकर सुरेरी थाने ले जाया गया।
पीड़ितों के अनुसार, थाने में उन्हें अलग स्थान पर रखा गया और उनके साथ मारपीट तथा दबाव बनाया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि उनसे मोबाइल और अन्य माध्यमों के जरिए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई।इन आरोपों की जांच अब एसआईटी कर रही है। इसलिए घटनाओं से जुड़े प्रत्येक दावे का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
जौनपुर के विजय राजभर से करीब 2.15 लाख रुपये ट्रांसफर कराने का आरोप
पहला मामला जौनपुर निवासी विजय राजभर की शिकायत से संबंधित है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में 17 सितंबर 2026 को थाना जलालपुर में मुकदमा दर्ज किया गया था।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित को कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा वाहन में बैठाकर ले जाया गया और उसके साथ मारपीट तथा धमकी देने का आरोप लगाया गया। इसके बाद मोबाइल फोन से यूपीआई के जरिए करीब 2.15 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराने और एटीएम से भी रकम निकलवाने की बात शिकायत में कही गई।पुलिस ने इस मामले में नामजद आरोपियों के साथ कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया था। बाद की जांच में पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका सामने आने के बाद एसआईटी ने इस पहलू को भी जांच में शामिल किया।
वाराणसी के सुशील पाण्डेय से 1.65 लाख की वसूली का आरोप
दूसरा मामला वाराणसी निवासी सुशील पाण्डेय की शिकायत से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में 22 सितंबर को सुरेरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सुशील पाण्डेय को फोन करके मिलने के लिए बुलाया गया। वहां मौजूद कुछ लोगों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताया और उन्हें वाहन से सुरेरी ले जाया गया।
पीड़ित का आरोप है कि उसके साथ दबाव और मारपीट की गई तथा करीब 1.65 लाख रुपये की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कराई गई। पुलिस के मुताबिक, शिकायत में एक खाताधारक के खाते में यूपीआई के माध्यम से रकम भेजे जाने की बात भी सामने आई है।इस मामले की जांच में अब बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुरेरी थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष पहले ही निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरेरी थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह को 18 सितंबर 2026 को निलंबित किया जा चुका है।
इसके बाद दोनों मामलों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र के निर्देश पर पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की गई।एसआईटी का पर्यवेक्षण अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जौनपुर आतिश कुमार सिंह के स्तर से किया जा रहा है, जबकि टीम का नेतृत्व सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर जौनपुर गोल्डी गुप्ता कर रहे हैं।
दो निलंबित आरक्षी गिरफ्तार, तीसरा आरोपी भी जेल भेजा गया
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की जांच के बाद 23 सितंबर को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में:
- सत्येन्द्र कुमार गौड़, निलंबित आरक्षी, पूर्व तैनाती थाना सुरेरी
- विष्णु सिंह, निलंबित आरक्षी, पूर्व तैनाती थाना सुरेरी
- मनीष पटेल, जिसके खाते में कथित तौर पर रकम ट्रांसफर किए जाने का उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड में है
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार दोनों आरक्षियों के खिलाफ जबरन वसूली, लूट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।
दो नामजद आरोपियों ने कोर्ट में किया सरेंडर
इस मामले में नामजद संकीत सिंह और विकास सिंह ने भी 23 सितंबर को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। इस तरह पुलिस के अनुसार दोनों मामलों में अब तक कुल पांच आरोपी गिरफ्तार या न्यायालय में आत्मसमर्पण कर चुके हैं।हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। इनमें पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। ऐसे आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें प्रयास कर रही हैं।
SIT जांच में डिजिटल लेनदेन भी अहम
इस मामले में कथित रूप से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए जाने के आरोप हैं। ऐसे में बैंक खातों, यूपीआई लेनदेन, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायतकर्ताओं से संबंधित रकम किन खातों में पहुंची, इन खातों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ और पूरे घटनाक्रम में अलग-अलग लोगों की भूमिका क्या रही।इसके अलावा घटनास्थल और संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है.
SSP कुंवर अनुपम सिंह का Zero Tolerance संदेश
जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने भ्रष्टाचार और अराजकता को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कही है। पुलिस के अनुसार, उनका स्पष्ट संदेश है कि किसी भी व्यक्ति को भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग की छूट नहीं दी जा सकती।
पुलिस विभाग में कार्यरत किसी व्यक्ति पर यदि कानून तोड़ने या पद का गलत इस्तेमाल करने के आरोप सामने आते हैं तो उसकी जांच की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।इस मामले में दो पुलिस आरक्षियों के खिलाफ हुई कार्रवाई को भी इसी जवाबदेही की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
जनता से SSP की अपील—अवैध वसूली की सूचना दें
SSP कुंवर अनुपम सिंह ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा अवैध वसूली, धमकी या दुर्व्यवहार किया जाता है तो इसकी जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी जाए।
उन्होंने लोगों से शिकायत करने में संकोच नहीं करने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक, ऐसी शिकायत मिलने पर उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह अपील इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस और जनता के बीच भरोसा कानून-व्यवस्था की व्यवस्था का अहम हिस्सा है। किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच और साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई से जवाबदेही की प्रक्रिया मजबूत होती है।
आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर
सुरेरी प्रकरण में शुरुआती कार्रवाई के बाद अब एसआईटी की विस्तृत जांच पर नजर है। पांच आरोपी पुलिस कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं, जबकि पुलिस के अनुसार कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी जांच में सामने आई है।
फिलहाल पुलिस टीम साक्ष्य जुटाने और संभावित अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच में लगी है। मामले में आगे होने वाली गिरफ्तारियां, जांच की प्रगति और न्यायालय में होने वाली कार्यवाही से तस्वीर और स्पष्ट होगी।
जौनपुर पुलिस की ओर से दिया गया Zero Tolerance संदेश इस कार्रवाई का प्रमुख पहलू है। हालांकि, आरोपों से जुड़े मामलों में अंतिम दोष सिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी। फिलहाल एसआईटी की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ रही है।
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